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सोनचिरया,सोनचिरया, मेरी प्यारी सोनचिरया…


सोनचिरया,सोनचिरया, मेरी प्यारी सोनचिरया… आज फुदक फुदक कर गायेगी, पंखो को फैलाएगी, मेरे आँगन की बगिया महकायेगी, तुलसी-मंडप में हरयाली लाएगी, प्यारी न्यारी बातें करके, शहद शब्दो का चखायेगी, मेरी सोनचिरया फुदक फुदक कर गायेगी, सबका मन बहलाएगी। कभी बात-बेबात को बतंगढ़ बनाकर, खुद ही खुद बड़बड़ाएगी, ख़ामोशी का चादर ओढ़ वो, ओठों को थरथराएगी, सोनचिरया आज किसी को, कुछ भी नहीं सुनाएगी। एक सॉरी … Continue reading सोनचिरया,सोनचिरया, मेरी प्यारी सोनचिरया…

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सच में, तुम हमे दीवाना सा आशिक़ बनाती हो…


तेरी उलझीं-उलझें केश, खुले गीले घुंगराले बाल, चेहरे पर गिरती लटे, लटों का उंगलियों संग खेलना, कान में गिरते लटों को फ़साना, फिर कुछ देर में दुबारा सा फिसलना, सच में, तुम हमे दीवाना सा आशिक़ बनाती हो। नाख़ूनी उंगलियों पर रंगबिरंगी कलाकारी, मोबाइल पर दौड़ती उंगलियों की रेलगाड़ी, बाएं कलाई में महीन सा लाल धागा, पहनी थी छोटी सी घड़ी बड़ी न्यारी, उसपर दौड़ते-कूदते-फांदते … Continue reading सच में, तुम हमे दीवाना सा आशिक़ बनाती हो…

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मम्मी आप भी न..!


स्नातकोत्तर तक अध्ययन करने के पश्चात अनिश्चितता युक्त क्या करूँ और क्या-क्या करूँ रूपी क्वेश्चन मार्क से जद्दोजहद कर ही रहा था कि नयी नवेली जॉब लगी, केंद्रीय विद्यालय(KV) नवरंगपुर ओड़िसा में गणित शिक्षक की । बचपन और किशोरावस्था गुजारने के बाद एक बार फिर से विद्यालय के कमरों में वापसी से पुरानी यादें जीवंत हो चुकी हैं। वो बदमाशियां, वो नादानियां, वो मास्टर साहेब … Continue reading मम्मी आप भी न..!

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Live Reporting from Hostel के छत से


  “भुभउ भुभउ……..पीउभभउु भू-भू-भू…….” कुत्ते रहरह कर भोक रहे हैं..! कुछ इन भू-भू-भू और भुभउ भुभउ के ज़रिये अपनी-अपनी जानेमन कुतिया के लिए प्यार का इजहार कर रहे हैं और कुछ प्यार पाने के लिए लड़ रहे हैं.. शायद ।  धीरे-धीरे रात जवाँ हो रही हैं… शाम को प्रारंभ हुई बारिश अबतक रूक चुकी हैं। बिजली रानी की आंखमिचौली अबतक जारी हैं। थोड़ी बारिश क्या हुई, ऐसा प्रतीत होता … Continue reading Live Reporting from Hostel के छत से

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उठो, जागों, कुछ काम करो, कण-कण में देश प्रेम का भाव भरो.।


कोई प्यार करो, कोई प्यार करो, मेरे देश से सब प्यार करो। भष्ट्राचारी और दुराचारियों की फौज से, मेरे देश का तुम उद्धार करो। क्रांतिकारी, वीर-सैनिकों को याद करके, जननी माताओं को प्रणाम करो। आजादी की यज्ञ वेदी में आहुति देने वाले, हर बन्दे को तुम सलाम करो। उठो, जागों, कुछ काम करो, कण-कण में देश प्रेम का भाव भरो..। राते मैंने भी गुजारी हैं, … Continue reading उठो, जागों, कुछ काम करो, कण-कण में देश प्रेम का भाव भरो.।

सच कहत यारा, तोहसे प्यार हो गइया।


तेरी झुकी-झुकी सी नजर, गजरे की महक और चूडियों की खनक, मेंहदी से सजे दोनों हाथों ने तो यारा, कमाल कर दिया, सच कहत यारा, तोहसे प्यार हो गइया। महावर से रंगे लाल पाव, पायल की गूंजती झंकार, हाथों से समय का दिदार, तेरे उलझें- घुंघराले बालों ने तो, कमाल कर दिया, सच कहत यारा, तोहसे प्यार हो गइया। कजरारी आंखों से नैनाचार, गीतकार के … Continue reading सच कहत यारा, तोहसे प्यार हो गइया।

Sculptural art related to stories of Lord Ganesha Ji


श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा, निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥ The Sodosha (sixteen) Ganapati Puja is a unique event to be held at Koraput, Odisha. 16 rupas of Ganesha are presented and worshipped for 21 days. The event takes place once in 11 years. All Pictures are captured from The Sodosha (sixteen) Ganapati Puja Pandal. © Pawan Belala   Continue reading Sculptural art related to stories of Lord Ganesha Ji

एक बच्चा स्कूल जा रहा हैं…


पीठी पर लादा भारी बस्ता, हाथ में टांग टिफिन बक्शा, मैले-कुचले कपड़ों और धुलसने जूतों में भी बेपरवाह, अलसाई धुंध से निकलकर, भागते अटपटे कदमों संग, एक बच्चा स्कूल जा रहा हैं। खट्‌मिट्ठी इमली का स्वाद, नीम की निबोलियों की महक, सरसों के पीले फूल और चिड़ियों की चहक, माँ के घोंसले का वात्सल्य त्याग, उदास खंडहर सा मुँह बना, एक बच्चा स्कूल जा रहा … Continue reading एक बच्चा स्कूल जा रहा हैं…

16 rupas of Lord Ganesha


श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा,  निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥ The Sodosha (sixteen) Ganapati Puja is an unique event to be held at Koraput, Odisha. 16 rupas of Ganesha are presented and worshipped for 21 days. The event takes place once in 11 years. इस वर्ष के गणपति बप्पा के १६ स्वरूपों के दर्शन का शौभाग्य मिला। गदगद मन से आप पाठको संग … Continue reading 16 rupas of Lord Ganesha

बच्चे तो बच्चे होते हैं, मन के सच्चे और अक्ल के कच्चे होते हैं।


शनिवार की शाम थीं। हालांकि अवकाश पसंद मेरा क्रांतिकारी मन ‘हफ्ते में चार शनिवार होनी चाहिए ‘ को ‘रंग दे बसंती चोला‘ की तर्ज पर लोकप्रिय बना कर भारतीय कार्यसंस्कृति को बदलने की मानसिक मुहिम  छेड़कर बंद कमरे में ढिंचक पूजा टाइप का चीख-चीख कर गाये जा रहा था। हालांकि शुक्र मनाइए कि मैंने गाने को अपने कमरे तक ही सीमित रखा, वरना इस क्रांति गीत … Continue reading बच्चे तो बच्चे होते हैं, मन के सच्चे और अक्ल के कच्चे होते हैं।

सावन का महीना, पवन करे शोर…


रेलगाड़ी के चलते ही फूल बूटे वाले सुनहरे पारदर्शी पेपर में लिपटा तोहफा खोलती है मायके से लौटती बहन अंदर है जरी की पट्टीदार रेशमी साड़ी जिस पर अपनी कमजोर उँगलियाँ फिराते हुए इतरा रही है साड़ी की फीरोजी रंगत नम आँखों में तिर रही है राखी बाँधकर बहन दिल्ली से लौट रही है अपने शहर सहारनपुर! #सुधा अरोड़ा देखो न, सावन कितना जल्दी बीत … Continue reading सावन का महीना, पवन करे शोर…

WordPress Notification:A Reason for Celebration


It’s time to say a very special Thanks and showing my heartfelt gratitude towards individual, who are the reasons of my blogging i.e. My beloved readers…. जी हाँ, 500 का आंकड़ा… फॉलोवर्स के मामले मे आपका फ़ेवरेट ब्लॉग पाचवीं शतक लगा चूका है। हालांकि कहने को तो वर्डप्रेस…. आप पाठको को फ़ॉलोअर्स मानता हैं, किन्तु वस्तुतः हरेक पाठक व्यक्तिगत तौर पर मेरा मित्र हैं।और जो … Continue reading WordPress Notification:A Reason for Celebration