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खैनी-चूना सा ये इश्क़ हैं… 💓


बड़े-बड़े नामी डाकटर साहेब लोग अकसर यह लैक्चर बकते पाए गए हैं कि तंबाकू-चूने के मिश्रण को होठों और गालों के अंदर चुटकी में भर कर दबाने की आदत मुंह के कैंसर को दवात देती हैं। अब देखो दादा, हमने कोनों रिसर्च या MBBS तो किया नही हैं, न ही मुझे सरकार के ‘ये मुकेश हैं‘ वाले विज्ञापनी दावों पर प्रश्नचिन्ह लगा कर चक्की पिसिंग … Continue reading खैनी-चूना सा ये इश्क़ हैं… 💓

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Diversity in unconditional friendship


Last week, I was searching  something in old books lying on the book shelf of my room. A wide collection of Books from the initial Nursery class to 10th-12th were covered themselves with dust sheet. While eliminating the dust from books, I got an old textbook of Class 6 titled Social and Political Life-I published by NCERT. A short story in its very first chapter titled ‘Understanding Diversity’ … Continue reading Diversity in unconditional friendship

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आओ, नूतन वर्ष मना लें…


आज आखें जल्दी खुली तो सुबह-सवेरे पड़ोस के छुटकू बगीचे में मेरे कदम थे। दिन के उष्ण झोकों के बदले अभी मौसम में काफी शीतलता व सुकून वाली वातावरणीय शांति थी। ऋतू परिवर्तन के संग पादपों व वनस्पति में प्रस्तुत परिवर्तनो को एक कोने में उस आम वृक्ष के तले बैठ निहार रहा था, जिसके संदर्भ में मैंने सुना हैं कि यह आम वृक्ष मुझसे … Continue reading आओ, नूतन वर्ष मना लें…

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नारी नहीं, मर्दानी थी, स्वतंत्रता की चिंगारी थी |


हम सभी के जीवन-पुस्तिका के प्रत्येक पन्नो को अपनी भिन्न-भिन्न इंद्रधनुषी भूमिकाओं द्वारा रंगने वाली नारियों को अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर असंख्य साधुवाद संग शुभकानाएं। नारी नहीं, मर्दानी थी, स्वतंत्रता की चिंगारी थी | देश के लिए यज्ञ-वेदी में आहुति देने वाली, ये भारतीय महिला स्वतंत्रता सेनानी थी | यह प्रारंभ नही, यह अंत नही, युग-युगांतर के गौरवगाथा की महारानी थी | पार्वती, सीता, उर्मिला, … Continue reading नारी नहीं, मर्दानी थी, स्वतंत्रता की चिंगारी थी |

YouTube प्लेटफार्म पर मेरे मुहीम संग जुड़िये.!


  गांव के मिट्टी के सौंधापन और बच्चों की कोमलता को समेटे, हृदय को मर्म-स्पर्श करके रोम रोम को पुलकित करने वाली रचनायें, कविता, कहानी और साहित्यिक विधा-संकलन के विभिन्न आयामों  में सुंदर सी भेट, मेरे आज और कल को.! आइये आप भी मेरे साथ YouTube प्लेटफार्म पर इस मुहीम में जुड़िये.! Please Like, Comment, Share and Subscribe to my YouTube channel पवन Belala Says … Continue reading YouTube प्लेटफार्म पर मेरे मुहीम संग जुड़िये.!

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तुम मेरी हो इस पल…मेरी हो


वैलेंटाइन वीक का आज 5वां दिन हैं, जो प्रेम शास्त्रों में प्रोमिस डे के रूप में स्वर्ण अक्षरों में अंकित हैं।सुबह से ही फ़ेसबुक, व्हाट्सएप, hike के अबतक ग्यारह चक्कर लगा चुका हूँ। तुम्हारी एयरटेल वाली नम्बर, जिसके लास्ट में 143 थी, उसपर भी अपनी जिओ से कई बार प्रयास कर चुके हैं। जिओ-एयरटेल के मिलाप की कोशिश में असफलता का स्वाद चखने के बाद … Continue reading तुम मेरी हो इस पल…मेरी हो

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तुम आओ न !


तपती धरती की तृष्णा मिटा, पत्तो, लताओं की प्यास बुझा, सोंधी मिट्टी को गले लगाकर, ताजे झोंखो संग पास तू आ। दहाड़, कड़क और चमक धमक संग, जब नाचती-गाती तू इठलाएगी। गांव गली के कृषक-मजदुर, खुशहाली के धुन गुनगुनायेंगे। सूखे तालाब की भूख मिटेगी, नदियों के अच्छे दिन आएंगे। मेरे मन का मोर सब देख, शहर इश्क का सजायेगाँ। सूरज शर्म से लौट गया, चाँद … Continue reading तुम आओ न !

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Live Reporting from Hostel के छत से…


  “भुभउ भुभउ……..पीउभभउु भू-भू-भू…….” कुत्ते रहरह कर भोक रहे हैं..! कुछ इन भू-भू-भू और भुभउ भुभउ के ज़रिये अपनी-अपनी जानेमन कुतिया के लिए प्यार का इजहार कर रहे हैं और कुछ प्यार पाने के लिए लड़ रहे हैं.. शायद ।  धीरे-धीरे रात जवाँ हो रही हैं… शाम को प्रारंभ हुई बारिश अबतक रूक चुकी हैं। बिजली रानी की आंखमिचौली अबतक जारी हैं। थोड़ी बारिश क्या हुई, ऐसा प्रतीत होता … Continue reading Live Reporting from Hostel के छत से…

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प्रश्न: गाँव के ऊपर टोला मुहल्ले में नववर्ष की पूर्वसंध्या पर आयोजित लौंडो के तांडव पार्टी की सप्रसंग व्याख्या करिये। नमक मिर्च के साथ लेमन छिड़कने पर अतिरिक्त अंक का प्रावधान हैं.?


उत्तर:  साल 2017 के अंतिम दिनों की गिनती करती, बूढ़ी दिसम्बर का काम अब लगभग तमाम हो चूका हैं। एक एंगल से सोचे तो बढ़िया ही हुआ, बेचारी इस कंकनाती ठण्ड में तर गयी। हरेक त्यौहार की भांति मित्रो का एक समूह महीनों पहले से whatsapp और fb massanger के द्वारा शुभाकामना संदेशो की बमबारी कर रहा हैं। इनमे विपरीत, कई मित्र हिंदुत्व और सनातनी … Continue reading प्रश्न: गाँव के ऊपर टोला मुहल्ले में नववर्ष की पूर्वसंध्या पर आयोजित लौंडो के तांडव पार्टी की सप्रसंग व्याख्या करिये। नमक मिर्च के साथ लेमन छिड़कने पर अतिरिक्त अंक का प्रावधान हैं.?

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सोनचिरया,सोनचिरया, मेरी प्यारी सोनचिरया…


सोनचिरया,सोनचिरया, मेरी प्यारी सोनचिरया… आज फुदक फुदक कर गायेगी, पंखो को फैलाएगी, मेरे आँगन की बगिया महकायेगी, तुलसी-मंडप में हरयाली लाएगी, प्यारी न्यारी बातें करके, शहद शब्दो का चखायेगी, मेरी सोनचिरया फुदक फुदक कर गायेगी, सबका मन बहलाएगी। कभी बात-बेबात को बतंगढ़ बनाकर, खुद ही खुद बड़बड़ाएगी, ख़ामोशी का चादर ओढ़ वो, ओठों को थरथराएगी, सोनचिरया आज किसी को, कुछ भी नहीं सुनाएगी। एक सॉरी … Continue reading सोनचिरया,सोनचिरया, मेरी प्यारी सोनचिरया…

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सच में, तुम हमे दीवाना सा आशिक़ बनाती हो…


तेरी उलझीं-उलझें केश, खुले गीले घुंगराले बाल, चेहरे पर गिरती लटे, लटों का उंगलियों संग खेलना, कान में गिरते लटों को फ़साना, फिर कुछ देर में दुबारा सा फिसलना, सच में, तुम हमे दीवाना सा आशिक़ बनाती हो। नाख़ूनी उंगलियों पर रंगबिरंगी कलाकारी, मोबाइल पर दौड़ती उंगलियों की रेलगाड़ी, बाएं कलाई में महीन सा लाल धागा, पहनी थी छोटी सी घड़ी बड़ी न्यारी, उसपर दौड़ते-कूदते-फांदते … Continue reading सच में, तुम हमे दीवाना सा आशिक़ बनाती हो…

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मम्मी आप भी न..!


स्नातकोत्तर तक अध्ययन करने के पश्चात अनिश्चितता युक्त क्या करूँ और क्या-क्या करूँ रूपी क्वेश्चन मार्क से जद्दोजहद कर ही रहा था कि नयी नवेली जॉब लगी, केंद्रीय विद्यालय(KV) नवरंगपुर ओड़िसा में गणित शिक्षक की । बचपन और किशोरावस्था गुजारने के बाद एक बार फिर से विद्यालय के कमरों में वापसी से पुरानी यादें जीवंत हो चुकी हैं। वो बदमाशियां, वो नादानियां, वो मास्टर साहेब … Continue reading मम्मी आप भी न..!

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उठो, जागों, कुछ काम करो, कण-कण में देश प्रेम का भाव भरो.।


कोई प्यार करो, कोई प्यार करो, मेरे देश से सब प्यार करो। भष्ट्राचारी और दुराचारियों की फौज से, मेरे देश का तुम उद्धार करो। क्रांतिकारी, वीर-सैनिकों को याद करके, जननी माताओं को प्रणाम करो। आजादी की यज्ञ वेदी में आहुति देने वाले, हर बन्दे को तुम सलाम करो। उठो, जागों, कुछ काम करो, कण-कण में देश प्रेम का भाव भरो..। राते मैंने भी गुजारी हैं, … Continue reading उठो, जागों, कुछ काम करो, कण-कण में देश प्रेम का भाव भरो.।

बेचारे Uncle चच्चा बन गए..


अपने छुटकू से शहर में, आज फिर अनजान-पहचान से गलियों में मंजिल की फ़िक्र के बिना पथिक रूपेण भटकने निकला था…मैं! अभी कुछ ही दूर, मुझे नंगे पैर मैली-कुचली यूनिफॉर्म और कांधे पर झोला लटकाये स्कूल से आते छोटे-मोटे हँसते खिलखिलाते नन्हे नटखटो की टोली दिखाई दी, जो सरकारी स्कूल रूपी कैदी खाने से मुक्त हो कर बाहर ही निकले थे…। उनको देखकर मे कुछ … Continue reading बेचारे Uncle चच्चा बन गए..

बोराये मन को बहलाता हूँ…!


मैमन्ता मन मारि रे, घट ही माहैं घेरि । जबहिं चालै पीठि दे, अंकुस दै-दै फेरि ॥ —कबीर (भावार्थ – मद-मत्त हाथी को, जो कि मन है, घर में ही घेरकर कुचल दो ।अगर यह पीछे को पैर उठाये, तो अंकुश दे-देकर इसे मोड़ लो ।) हृदय में उमड़ती भावनायें व मस्तिष्क में उमड़ा विचार कितना क्षणभंगुर होता हैं न..। मन-मस्तिष्क में कई बार इतने … Continue reading बोराये मन को बहलाता हूँ…!

तोड़ो – रघुवीर सहाय


नवाबों के शहर लखनऊ में जन्मे, पेशे से पत्रकार स्व. रघुवीर सहाय जी की लिखी एक कालजयी उद्बोधनपरक कविता आज आपसबों संग साझा कर रहा हूँ। तो आइए, इन पंक्तियों में गोते लगाते हुए हम सृजन हेतु पथ पर अवरोध उत्पन्न करने वाले पत्थर-चट्टानों को तोड़ते हैं…. तोड़ो तोड़ो तोड़ो ये पत्‍थर ये चट्टानें ये झूठे बंधन टूटें तो धरती का हम जानें सुनते हैं … Continue reading तोड़ो – रघुवीर सहाय

तू लौंग मैं इलाइची ❤️


जानती हो, बहुत गुस्सा आता हैं आजकल हमको। बहुत… मतलब बहुत…बहुत ही ज्यादा। तुम्हारे विरह के आग में सुलग सुलग कर धधकते मन को करता हैं कि ससुरी बेवफ़ा जमाने को फूक दे और फिर खुद को भी। कुछ याद भी हैं तुमको, आज पूरे 12 महीने हो गए गपियाये…यानी पूरे1वर्ष। लास्ट वो पिछली ईद पर मुबारकबाद दी थी मैंने और तुमने मेरे लिए स्पेशल … Continue reading तू लौंग मैं इलाइची ❤️

खुद को प्रदूषित होने से बचाइये..!


आचार, विचार और संस्कार में हो रहे अंधाधुंध संक्रमणों के मध्य…..आत्मवलोकन करते हुए प्रदूषण वायरस के प्रभाव से स्वयं को संक्रमित व प्रदूषित होने से बचाइये, बाकी हमारे राम जी सबकुछ ठीक कर देंगे। Continue reading खुद को प्रदूषित होने से बचाइये..!

जिंदगी में ओवर लोड़ मत लीजिए…


चेहरा क्या देखते हो, दिल मे उतर के देखो ना… मौसम पल मे बदल जाएगा पत्थर दिल भी पिघल जाएगा मेरी मोहब्बत मे है कितना असर देखो ना चेहरा क्या देखते हो… हाँ, माना कि शारिरिक हुलिया और मन-मस्तिष्क में डोल रहे लूलिया का प्रतिबिंब चेहरे के दर्पण की चमक से ही साफ साफ झलकता हैं। लेकिन जिस दिन हम-आप बूढ़े हो जाएंगे न…तो ये … Continue reading जिंदगी में ओवर लोड़ मत लीजिए…

My First Vote for Silli


मरणासन्न अवस्था में पहुंच कर नाम मात्र में बचें, लोकतंत्र व लोकतांत्रिक व्यवस्था पर जब भी अवसर प्राप्त हो… उंगली करना जरूरी हैं। ऐसा उंगली कीजिए कि तथाकथित राजनैतिक महत्वाकांक्षी ठेकेदारों के मुँह से खून और झाग साथ साथ निकल पड़े। क्योंकि हम-आप जैसे आम नागरिक प्रत्येक 5 वर्ष के अंतराल में एकबार उंगली ही कर सकते हैं। मुर्गा-मुर्गी, खस्सी-दारू, गहरा गुलाबी यानि मैजेंटा(₹2000) और … Continue reading My First Vote for Silli

प्यारे सिल्ली विधानसभा वासियों….


प्यारे सिल्ली विधानसभा वासियों, सादर प्रणाम साढ़े तीन वर्ष उपरांत, एक बार फिर कल हम… हमारे गांव-घर से एक प्रतिनिधि चुनकर इस उपचुनाव में विधानसभा भेजने जा रहे हैं। ग़रीब व उनकी गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, संसाधनों का बंदरबांट, हड़िया-दारू व गुटखा-तम्बाकू के नशे में मदहोश युवा, प्रखंड(ब्लॉक) से ग्राम पंचायत स्तर पर जकड़ी भर्ष्टाचार की गहरी जड़ें से लेकर और कितने कारण है आपके समक्ष … Continue reading प्यारे सिल्ली विधानसभा वासियों….