ये खबर छपवा दो अखबार में, पोस्टर लगवा दो बाजार में…


अपने यहाँ आजकल नेताजी लोग जनता के लिए सुबह से लेकर शाम तक, शाम से लेकर रात तक, रात से लेकर सुबह तक और सुबह से फिर शाम तक बस यही गाना गुनगुना रहे हैं… क्यों पैसा पैसा करती है क्यों पैसे पे तू मरती है क्या बात है क्या चीज़ है पैसा क्या बात है क्या चीज़ है पैसा एक बात मुझे बतला दे … Continue reading ये खबर छपवा दो अखबार में, पोस्टर लगवा दो बाजार में…

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इश्क की गाथा इतिहास बन जाये।


हवा में कल वाली बात नहीं सुहाने लम्हों का आज साथ नहीं गजलों में हकीकतों का हिसाब नहीं परवाह करने वाले ही जब पराये हो फिर सावन-भादों में भी बूंदो की प्यास नहीं। मुसाफिरों सी टकराहट हुई थी होठों पर हंसी की मिलावट हुई थी दोस्ती की रूह पर, भरोसे की सजावट हुई थी मोहब्बत, पाकीजा, दीवानगी, सादगी, हुस्न, कशिश, दिलकश, हया, इबादत… जाने कितने … Continue reading इश्क की गाथा इतिहास बन जाये।

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चुनावी सर्दी में दलित बजरंगबली


“बजरंगबली एक ऐसे लोक देवता हैं, जो स्वयं वनवासी हैं, निवासी हैं, दलित हैं, वंचित हैं. भारतीय समुदाय को उत्तर से लेके दक्षिण तक, पूरब से पश्चिम तक, सबको जोड़ने का काम बजरंगबली करते हैं।” उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा अलवर जिले के मालाखेड़ा की एक चुनावी रैली में बड़बोले बयान के बाद सोशल मीडिया पर भूकंप और मुख्यधारा की मीडिया में सुनामी … Continue reading चुनावी सर्दी में दलित बजरंगबली

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सुबह-ए-उद्यान (Live From Park)


‘उफ्फ… थक गया यार।‘ पार्क के किसी किनारे पर खाली पड़े कुर्सी पर पसरता, मैं मन ही मन बड़बड़ाते हुए माथे पर छलके पसीने को हाथों से निचोड़ा। पेंट के दाएं पॉकेट की जीप खोल पॉकेट से मोबाईल निकाला। तर्जनी स्पर्श द्वारा मोबाईल पाश खोलने के उपरांत…गूगलवा का कनिष्ट एप्प पुत्र गूगल फिट पर हथोड़ा रूपी अंगुष्ठ प्रहार किया, परिणामस्वरूप एक चीत्कार संग कुछ आकड़े … Continue reading सुबह-ए-उद्यान (Live From Park)

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नारी नहीं, मर्दानी थी, स्वतंत्रता की चिंगारी थी |


हम सभी के जीवन-पुस्तिका के प्रत्येक पन्नो को अपनी भिन्न-भिन्न इंद्रधनुषी भूमिकाओं द्वारा रंगने वाली नारियों को अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर असंख्य साधुवाद संग शुभकानाएं। नारी नहीं, मर्दानी थी, स्वतंत्रता की चिंगारी थी | देश के लिए यज्ञ-वेदी में आहुति देने वाली, ये भारतीय महिला स्वतंत्रता सेनानी थी | यह प्रारंभ नही, यह अंत नही, युग-युगांतर के गौरवगाथा की महारानी थी | पार्वती, सीता, उर्मिला, … Continue reading नारी नहीं, मर्दानी थी, स्वतंत्रता की चिंगारी थी |

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तुम मेरी हो इस पल…मेरी हो


वैलेंटाइन वीक का आज 5वां दिन हैं, जो प्रेम शास्त्रों में प्रोमिस डे के रूप में स्वर्ण अक्षरों में अंकित हैं।सुबह से ही फ़ेसबुक, व्हाट्सएप, hike के अबतक ग्यारह चक्कर लगा चुका हूँ। तुम्हारी एयरटेल वाली नम्बर, जिसके लास्ट में 143 थी, उसपर भी अपनी जिओ से कई बार प्रयास कर चुके हैं। जिओ-एयरटेल के मिलाप की कोशिश में असफलता का स्वाद चखने के बाद … Continue reading तुम मेरी हो इस पल…मेरी हो

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तुम आओ न !


तपती धरती की तृष्णा मिटा, पत्तो, लताओं की प्यास बुझा, सोंधी मिट्टी को गले लगाकर, ताजे झोंखो संग पास तू आ। दहाड़, कड़क और चमक धमक संग, जब नाचती-गाती तू इठलाएगी। गांव गली के कृषक-मजदुर, खुशहाली के धुन गुनगुनायेंगे। सूखे तालाब की भूख मिटेगी, नदियों के अच्छे दिन आएंगे। मेरे मन का मोर सब देख, शहर इश्क का सजायेगाँ। सूरज शर्म से लौट गया, चाँद … Continue reading तुम आओ न !

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Live Reporting from Hostel के छत से…


  “भुभउ भुभउ……..पीउभभउु भू-भू-भू…….” कुत्ते रहरह कर भोक रहे हैं..! कुछ इन भू-भू-भू और भुभउ भुभउ के ज़रिये अपनी-अपनी जानेमन कुतिया के लिए प्यार का इजहार कर रहे हैं और कुछ प्यार पाने के लिए लड़ रहे हैं.. शायद ।  धीरे-धीरे रात जवाँ हो रही हैं… शाम को प्रारंभ हुई बारिश अबतक रूक चुकी हैं। बिजली रानी की आंखमिचौली अबतक जारी हैं। थोड़ी बारिश क्या हुई, ऐसा प्रतीत होता … Continue reading Live Reporting from Hostel के छत से…

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प्रश्न: गाँव के ऊपर टोला मुहल्ले में नववर्ष की पूर्वसंध्या पर आयोजित लौंडो के तांडव पार्टी की सप्रसंग व्याख्या करिये। नमक मिर्च के साथ लेमन छिड़कने पर अतिरिक्त अंक का प्रावधान हैं.?


उत्तर:  साल 2017 के अंतिम दिनों की गिनती करती, बूढ़ी दिसम्बर का काम अब लगभग तमाम हो चूका हैं। एक एंगल से सोचे तो बढ़िया ही हुआ, बेचारी इस कंकनाती ठण्ड में तर गयी। हरेक त्यौहार की भांति मित्रो का एक समूह महीनों पहले से whatsapp और fb massanger के द्वारा शुभाकामना संदेशो की बमबारी कर रहा हैं। इनमे विपरीत, कई मित्र हिंदुत्व और सनातनी … Continue reading प्रश्न: गाँव के ऊपर टोला मुहल्ले में नववर्ष की पूर्वसंध्या पर आयोजित लौंडो के तांडव पार्टी की सप्रसंग व्याख्या करिये। नमक मिर्च के साथ लेमन छिड़कने पर अतिरिक्त अंक का प्रावधान हैं.?

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सोनचिरया,सोनचिरया, मेरी प्यारी सोनचिरया…


सोनचिरया,सोनचिरया, मेरी प्यारी सोनचिरया… आज फुदक फुदक कर गायेगी, पंखो को फैलाएगी, मेरे आँगन की बगिया महकायेगी, तुलसी-मंडप में हरयाली लाएगी, प्यारी न्यारी बातें करके, शहद शब्दो का चखायेगी, मेरी सोनचिरया फुदक फुदक कर गायेगी, सबका मन बहलाएगी। कभी बात-बेबात को बतंगढ़ बनाकर, खुद ही खुद बड़बड़ाएगी, ख़ामोशी का चादर ओढ़ वो, ओठों को थरथराएगी, सोनचिरया आज किसी को, कुछ भी नहीं सुनाएगी। एक सॉरी … Continue reading सोनचिरया,सोनचिरया, मेरी प्यारी सोनचिरया…

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सच में, तुम हमे दीवाना सा आशिक़ बनाती हो…


तेरी उलझीं-उलझें केश, खुले गीले घुंगराले बाल, चेहरे पर गिरती लटे, लटों का उंगलियों संग खेलना, कान में गिरते लटों को फ़साना, फिर कुछ देर में दुबारा सा फिसलना, सच में, तुम हमे दीवाना सा आशिक़ बनाती हो। नाख़ूनी उंगलियों पर रंगबिरंगी कलाकारी, मोबाइल पर दौड़ती उंगलियों की रेलगाड़ी, बाएं कलाई में महीन सा लाल धागा, पहनी थी छोटी सी घड़ी बड़ी न्यारी, उसपर दौड़ते-कूदते-फांदते … Continue reading सच में, तुम हमे दीवाना सा आशिक़ बनाती हो…

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उठो, जागों, कुछ काम करो, कण-कण में देश प्रेम का भाव भरो.।


कोई प्यार करो, कोई प्यार करो, मेरे देश से सब प्यार करो। भष्ट्राचारी और दुराचारियों की फौज से, मेरे देश का तुम उद्धार करो। क्रांतिकारी, वीर-सैनिकों को याद करके, जननी माताओं को प्रणाम करो। आजादी की यज्ञ वेदी में आहुति देने वाले, हर बन्दे को तुम सलाम करो। उठो, जागों, कुछ काम करो, कण-कण में देश प्रेम का भाव भरो..। राते मैंने भी गुजारी हैं, … Continue reading उठो, जागों, कुछ काम करो, कण-कण में देश प्रेम का भाव भरो.।

Are you happy now?


विश्व खुशहाली रिपोर्ट 2019, संयुक्त राष्ट्र के लिए सतत विकास समाधान नेटवर्क द्वारा 20 मार्च को जारी की गई। इस तिथि को संयुक्त राष्ट्र ने अंतर्राष्ट्रीय खुशी का दिन घोषित किया है।आय, स्वतंत्रता, विश्वास, स्वस्थ जीवन प्रत्याशा, सामाजिक सहायता और उदारता : जैसे छह प्रमुख अवयवों का समर्थन करने वाले 156 देशों को विभिन्न स्थानों पर शुमार किया है। लगातार दूसरे वर्ष सबसे अधिक खुश … Continue reading Are you happy now?

प्रेम क्या है ?


कहते हैं, प्यार तारीखों का मोहताज नहीं होता… फिर भी प्यार करने वालो के लिए फरवरी खास होता है। वैसे तो प्यार पर आज सोशल मीडिया पर बहुत लोगों ने बहुत कुछ लिखा। तरह-तरह के मीम, जॉक्स, कविता, कहानी, इज़हार, रार-इक़रार की बाढ़ सी आयी हुई हैं, ऊपर से मातृ-पितृ दिवस मनाने वालों और बजरंग दल के लठीधारियों का अपना अलग ही स्वैग हैं। इन … Continue reading प्रेम क्या है ?

वसंत आया


आज मनुष्य का प्रकृति से रिश्ता टूट गया है। वसंत ऋतु का आना अब अनुभव करने के बजाय कैलेंडर की तारीखों से जाना जाता है। जनवरी-फ़रवरी के तोतलेबाजी में अमावास्या, एकादशी और पूर्णिमा के सामान कई विशेष दिन, माह और ऋतु हमारे लिए महत्वविहीन से हो चले हैं। दादा नाना के पञ्चाङ्ग को हमारे मोबाइल ने घर से बाहर का रास्ता दिखाया हैं। ऋतुओं में … Continue reading वसंत आया

मनाही हैं !


कई साल बीते, कुछ महीने छूटे, सप्ताह-दिनों की तो आनी जानी हैं। जीवन के उस अधूरे हिस्से में आज भी, सबके आने की मनाही हैं। सावन-भादो सब बीत गया, होठों पे मुस्कान बेमानी हैं। आम पीपल सब ठूंठ हो गए, नदी रेत से मांगे पानी हैं। सिसकतीं ख्वाइशे, तन्हाई और रुसवाई में, चर्चाओं का चनाचूर गरम हैं। महफ़िलो में सुकून-ए-दिल भी बेंच, रात की आहटों … Continue reading मनाही हैं !

रावण Laughing@दशहरा


#hehahaha…. 🙂 🙂 खुश तो बहुत हो रहे होंगे साल दर साल मेरी बड़ी- बड़ी पुतलो को आग लगा कर के…फूंक के ! कितना प्रदूषण करते हो… वायु, ध्वनि से लेकर आकाश तक के निर्मलता को दूषित कर देते हो…  हां हुई थी मुझसे पाप एक दफा, बहन के अपमान से तिलमिलाकर, जिस पाप की सजा मे, मैं हर साल जल रहा हूँ..!  जो पाप अब तुम्हारे यहाँ fashion … Continue reading रावण Laughing@दशहरा

विदाई का दर्द और सूनापन : रिवाज के विभिन्न रंग (Felling Heart broken and alone at Durga Pandal)


Originally posted on पवन Belala Says❣:
पंडाल वाले साउंड बॉक्स पर दुर्गा अमृतवाणी का पाठ अनुराधा पौडवाल जी कर रही हैं..! विभिन्न अंतराल में भोजपुरी, बंगला और हिंदी वाले देवी भजन बज रहे हैं..! लाइट वाले धीरे धीरे सामान समेटने की तैयारी कर रहे हैं..! मिठाई, Ice-cream,  बादाम, गोलगप्पा वाले भाई लोग अंतिम दिन का चांदी काटने के लिए रामलीला मैदान का रूख कर रहे हैं… Continue reading विदाई का दर्द और सूनापन : रिवाज के विभिन्न रंग (Felling Heart broken and alone at Durga Pandal)