डिअर जिंदगी, गले लगा ले..!

डिअर जिंदगी, दिसम्बर के प्रारंभ से ही गुलाबी ठण्ड लाल हो चुकी हैं. गोधूली बेला में ही रजाई में घुसकर गर्माहट का अनुभव अवर्णनीय हैं. रजाई और कम्बलों में स्वयं को छुपाकर ठण्ड को ठेंगा दिखाने की नटखट सोच से ही मन प्रसन्नता का अनुभव करने लगता हैं. रजाई के अन्दर से ही माँ के हाथों तला गरमा-गर्म पकौड़े और चाय के प्याले का जवाब ही नहीं. मफलर से ढका सर, रजाई से बस इतना ही निकला रहता जैसे चूहा अपने बिल से बाहर झाक रहा हो और जिसकी उत्सुक कातर लेन्स से ढकी आँखे अपनी चुहिया को खोज रहे हो.

डियर जिंदगी, याद हैं न तुझे पिछले साल के दिसंबर की वो शाम. कैसे भूल सकते, हमारे जीवन रुपी इतिहास का 15 अगस्त 1947 ही था वो दिन, जब हम दोने ने सामाजिक बेडियो को तोड़कर मन की स्वतंत्रता प्राप्त कर ली थी. अनेको सामाजिक रीति-रिवाज और मान्यताओ के दुहाई पर बेटियो को तिजोरी के सिक्के समझने वाले गाँव से खुले गगन से साँस लेने के लिए शहर के प्रतिष्ठित संस्थान में नामांकन करवाया था तुमने, और मै परिवारवालों के इंजीनियरिंग करवाने के तुगलकी फरमान के वाबजूद हिन्दी भाषा साहित्य को चुना था. दोनों की राहे आसान नही थी, पर जज्बे के सामने हरेक रोड़े धुल में बदल गये.

डिअर जिंदगी, किताबों से दोस्ती में उलझे कब हम एक दूजे के इतने करीबी हो गये पता भी न चला. आप मुझे रामधारी सिंह दिनकर कहती और मै आपको सुभद्रा कुमारी चोहान. हां आपको मीरा से काफी लगाव था और मुझे सूरदास और कबीर जी. वीर रस से प्रारंभ हमारी चर्चा सोन्दर्य रस पर सिमटती थी, हां वात्सल्य में आपके आँखों को नीरमय होते कई बार देखा था मैंने. आप न मिलती तोह शायद  मैं समास के ज्ञान से अनभिज्ञ ही रह जाता शायद. चीजो को कितनी सरलता से अभिव्यक्त करती हैं आप.

डिअर जिंदगी, वो शुक्रवार की शाम वाली हाउसफुल शो के टिकट ब्लैक में ज्यादा कीमत देकर खरीदना, हीरो के आने पर आपका खड़े होकर सिटी बजाना, नायिका और उसके सारे खानदान की ड्रेसिंग सेंस पर मुझसे चर्चा करना, इन्टरवल में पॉपकॉर्न मेरे साथ साझा करना, किरदारों में समाकर आँखे गीली कर लेना फिर खुद को मजबूत साबित करने के लिए मुस्कुराकर आंसू पीना. धन्य विचित्र प्राणी थी आप, और मैं आपका “पता नहीं.?”

डिअर जिंदगी, सिनेमाघर से मूवीज के बाद बाहर निकलकर मेरे पान खाने पर आपका भी पान आर्डर करना. अपनी जीभ निकलकर खुद की जीभ को मेरे जीभ से ज्यादा लाल होने का दावा करना, मेरे हार मानने के वाबजूद मुझसे जीभ दिखने की जिद. सामने गोलगप्पे वाले को देखकर मेरा हाथ खीचना, फिर वास्ता देकर मुझे गुपचुप खाने पर मजबूर करना. कितनी तीखी थी उस दिन इमली पानी.!

याद हैं जाते जाते उसदिन आपने आइस-क्रीम खा ली थी. जिसका क्रीम आपके नाक में लग गया था. मै हँसे जा रहा था और आप गुस्से से लाल. एक्चुअली उस वक्त आप काफी क्यूट लग रही थी. नेक्स्ट मोर्निंग कॉल किया तोह आपकी रूममेट सहेली ने बताया की रात से आपको बुखार हैं. कितनी टेंशन हुई थी मुझे पता हैं..? पुरे तीन दिन नहीं मिल पाए थे हमदोनो. प्लीज ठण्ड में आइस-क्रीम और गोलगप्पे वाली आदत सुधार लो वरना मेको टेंसन होने लगती हैं.

मुझे पता हैं “मेली सोना, आप अपने बाबु को टेन्स में नहीं देख सकती न.! मेली बच्ची अपना ख्याल रखना, बाकि ढेल सारा प्यार, लव यू… ऊऊऊऊउ झप्पी..”  समय के पहिये की वृतीय गति के बीच दोस्त तोह अनेकों हैं मेरे फेसबुक और whatsapp में पर आपकी वाली जगह आज भी रिक्त हैं. डिअर जिंदगी कोई भी तुझ सा नहीं.

PC: Google Image Search

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