न नाम मांगता हूँ, न जात मांगता हूँ !

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न नाम मांगता हूँ,
न जात मांगता हूँ |
अधिकारों और कर्तव्यों की,
सौगात मांगता हूँ |

याचक बनना रास नही,

अधिकार पाने की आस नही |

परिवर्तन की अतुलनीय चाह में,

बलिदान मांगता हूँ |

अधिकारों और कर्तव्यों की,

सौगात मांगता हूँ |

ओछी तेरी माया हैं,
वसूलो से कमजोर तेरी लालची काया हैं |
भष्टाचार और शोषण से फला-फूला,
बहुत कमजोर तेरा शाया हैं |
मन-मस्तिष्क में गाठ बांध के,
सम्मान मांगता हूँ |
अधिकारों और कर्तव्यों की,
सौगात मांगता हूँ |

जब-जब पाप करेगा तू,

अपने आप मरेगा तू |

श्राप और बद्दुआओं के चार दिवारी में,

कब तक सांस भरेगा तू |

माँ-बहनों की आंसू और चीत्कार बन,

परिणाम मांगता हूँ |

अधिकारों और कर्तव्यों की,

सौगात मांगता हूँ |

लड़ना रास आता मुझे,
मरना खास आता मुझे |
बांध कफ़न का कपड़ा सर पे,
सरपट दौड़ना भाता मुझे |

हैं हिम्मत, तो रोक कर देख,

तनिक मुझे तू टोक के देख |

राही हूँ मैं, जटिल पथो का,

पंखो संग खुले नभ की सौगात मांगता हूँ |

न नाम मांगता हूँ,

न जात मांगता हूँ |

अधिकारों और कर्तव्यों की,

सौगात मांगता हूँ |

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© Pawan Belala 2017

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43 thoughts on “न नाम मांगता हूँ, न जात मांगता हूँ !

    1. समाज और व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार, मानवीय अधिकारों का हनन, जवाबदेही तय नही होना आदि पर वार करते हुए जातिवाद, धर्मान्धता, भाई भतीजावाद को शब्दों के आगोश मे लेने की एक बहुत छोटी कोशिश की हैं।
      पंक्तियों का केंद्र बिंदु हम औऱ आप हैं, जो इन सब कुव्यवस्था से मुक्त होना चाहते हैं।

      Liked by 2 people

  1. कविता बहुत ही अच्छी है पर
    आपको नही लगता कि कविता में इन पंक्तियों का कुछ अलग ही मतलब निकलता हैं
    शुद्र तेरी माया हैं,

    कमजोर तेरी लालची काया हैं |

    भष्टाचार और शोषण से फला-फूला,

    Liked by 2 people

      1. पवन जी शुद्र जो है वो मुझे नही लगता कि लालची रहे होंगे या है अगर ऐसा होता उनकी समाज में इतनी नीची स्थिती नही होती…

        Liked by 2 people

  2. हाँ पवन मैं भी मुकांसु से सहमत हूँ…लेकिन,हालांकि मेरी मतों में आपने वैसा सोच के तो नहीं लिखा होगा जैसा हमारे समक्ष ये delivered हुआ…

    वैसे बहुत खूबसूरत लिखा है आपने👍

    Liked by 2 people

    1. जी धन्यवाद् ज्योति !
      भूलवश मैंने शब्दों के साथ अन्याय किया था |
      भाई मुकांशु और आपके सुझाव के बाद मैंने पोस्ट अपडेट कर लिया हैं |

      Liked by 2 people

      1. Hahahaha बहुत अच्छे मै सोचु यार इस बन्दे को मेरा नाम कैसे मालूम हुआ होगा…
        अच्छा लगा की आपकी कहानी में मेरे नाम का भी किरदार है ।
        वैसे कौनसी कहानी है ये । पढ़ना चाहूंगा

        Liked by 1 person

      2. जी…पवन ये सब होते रहता हैं लेकिन सच में ख़ुशी होती है जब हम बेहिचक अपनी बात रखते हैं और सामने वाला हमें समझ लेते हैं… बाकी तो आपकी शब्दों में तो बस जादू हैं!! हमलोग सदा यूँहीं एक दूसरे के साथ रहेंगे…

        Liked by 1 person

      3. निसंकोच, ब्लॉगिंग के इस प्लेटफार्म में हमने
        भावनात्मक जुड़ाव के संग एक परिवार बसा लिया हैं हमने |
        मुझे गर्व हैं स्वयं और मेरी लेखको वाली मित्र मंडली पर , कि जिस परिवार के आप अभिन्न सदस्य हैं |

        Like

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