हमे पागल ही रहने दो, हम पागल ही अच्छे हैं |

सिने पर जो जख्म हैं, सब फूलों के गुच्छे हैं |
हमे पागल ही रहने दो, हम पागल ही अच्छे हैं |
भगत सिंह जी के इन शब्दों को अपने कमरे की दीवारों में उकेरते हुए, स्वयं में चरितार्थ किया हैं मेरे अनुज भाई मिठ्ठू ने | मिट्ठू : जितना मीठा नाम, उससे भी ज्यादा शहद युक्त मीठा व्यवहार |उड़ीसा केन्द्रीय विश्वविद्यालय, पुरुष छात्रावास के कमरा संख्या A-303 से अभी-अभी वापस लौटा हूँ | मेरा यह कोहोस्टलर भाई बहती हवा और विचारधारा से काफी कुछ अलग हैं | खान, यों-यों, बादशाह की वाहियात विचारधाराओं को ताक पर रखने वाले युवा पीढ़ी के इस बेटे का भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और डॉ कलाम के प्रति आस्था को देखकर, मेरे भावविभोरित मन में आज अद्भुत वैचारिक शांति हैं !IMG_20170408_230529

आज के इस ऑनलाइन युग में निसंकोच फेसबूकिया क्रांतिकारी और # टेग धारी ट्विटर वाले देशभक्तों की बाढ़ सी आ गयी हैं, जिनकी कथनी से थोथा चना बाजे घाना की भाति जुमला निकलती हैं ! भोले बाबा और पार्वती मैया को खुश करने के लिए ये क्या-क्या पैतरा नही अपनाते, परन्तु अपने जननी माँ-बाप की सुध लेने की फुरसत किसे ? भाई-बहन, नारी शक्ति, कर्रपसन पर लंबी लंबी लेख झारनेवाले इतनी आसानी से यूनिवर्सिटी का फी जमा करते वक्त पंक्ति पर घुटने टेक लेते हैं, आप सोच भी नही सकते |
आज अधिकारों के लिए भूखे-नंगे का स्वांग रच मानसिक विकार से ग्रसित कुछ लोगों ने कर्तव्यो से आँखे मूंद ली हैं | हम इस देश का विकास तो चाहते हैं लेकिन विवाद का विकास ये है कि हम राष्ट्रगीत और राष्टगान गाएंगे या नहीं गाएंगे. भारत माता की जयकारा लगायेंगे या नही | योग और आयुर्वेद, कत्लखाने और गाय को धार्मिक गेंरुआ जामा पहनाएंगे या नहीं | हमें इस तरह की संकीर्णता से निकलना होगा.
नाम: आजाद
पिता का नाम : स्वतंत्रता
निवास स्थान : जेल
ऐसे थे , मेरे प्रिय आजाद।
हमारे देश के खाटी बेटा चंद्रशेखर आजाद जी, जो जीये भी तो अपने टर्म एंड कंडीशन पर और मौत का वरण भी किया अपनी आखरी बुलेट पर। हमने इन सबको कितनी आसानी से भूल रहे हैं न !
कुछ लोगों का ये मानना भी सही हैं, कि वो ये सब में भेजा को क्यों भेजे ? मार्क्स तो न्यूटन बाबा के सिधांत और गणित के x और y वाले इंटीग्रेशन-डिफफ्रेंसियेसन से आयेंगे ! रखे याद हिस्ट्री सिविक्स वाले |
मैं जिन चंद क्रन्तिकारी देशभक्तों से प्रभावित हूँ, उनमे से अग्रणी जननायको के प्रति इस बालक द्वारा व्यक्त श्रधाभाव ने मेरे मानस पटल को पूर्वाग्रहों से मुक्त कर दिया हैं |मैं अब दावे के संग कह सकता हूँ, हमारी ऐतिहासिक और वैचारिक विरासत, भारितीय मन की पवित्रता और स्वाधीनता सेनानियों का त्यागपूर्ण योगदान कभी धूमिल नही हो सकती | बस जरुरत और जिम्मेवारी हैं, तथ्यों को सादगीपूर्ण और पवित्रता से सरोबार करते हुए युवायों के मानस पटल में स्थान्तारित करने की | अन्यथा कोई मानसिक बिभाचारी ऐतिहासिक तथ्यों को संक्रमित कर हमारे भविष्य को वैचारिक रूपेण न बरगला बैठे |
देश हित में आहुति देने वाले सभी ईश्वरीय आत्माओं को हृदय की गहराइयों से नमन करते हुवे मिट्ठू जैसे युवाओ को मेरा सलाम 🙂
जय हिन्द !

© Pawan Belala 2017

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19 thoughts on “हमे पागल ही रहने दो, हम पागल ही अच्छे हैं |

  1. बोलने की आज़ादी ने सोचने की आज़ादी को पंगु बना दिया है।
    कहावत है कि बेवकूफ आदमी अगर चुप रहे तो बेहतर है। पर हर चुप रहने वाला आदमी बेवकूफ नहीं होता।
    जुगत ये है कि तर्क अगर भक्ति का साथ दे दे तो महाभारत से गीता निकलती है।
    “अश्वथामा मारा गया” सत्य है
    “नरो न कुंजरो” ये भी सत्य था पर शंखनाद से दबा दिया गया। छल से धर्म की जीत।
    पर आजकल सब उल्टा है दोस्त।

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