उठो, जागों, कुछ काम करो, कण-कण में देश प्रेम का भाव भरो.।

कोई प्यार करो, कोई प्यार करो, मेरे देश से सब प्यार करो।
भष्ट्राचारी और दुराचारियों की फौज से, मेरे देश का तुम उद्धार करो।
क्रांतिकारी, वीर-सैनिकों को याद करके, जननी माताओं को प्रणाम करो।
आजादी की यज्ञ वेदी में आहुति देने वाले, हर बन्दे को तुम सलाम करो।
उठो, जागों, कुछ काम करो, कण-कण में देश प्रेम का भाव भरो..।

राते मैंने भी गुजारी हैं, आशिकों की बस्ती में।
जाम मैंने भी चखा हैं, मदहोशी और मस्ती में।
पर सुकून तो मिलता हैं, देशभक्तों की बारातो में।
खून की होली में और गोलियों की दीपावली से, जयचंदों का काम तमाम करो।
उठो, जागों, कुछ काम करो, कण-कण में देश प्रेम का भाव भरो।

दर्द तुझे भी हैं, दर्द मुझे भी हैं, इस दर्द का कोई समाधान करो।
बहुत बहाया जाति-धर्म नाम पर, लाल कतरे का और ना अपमान करो।
आशिक़ हूँ, इस लाल लहू का, तुम और मत लहूलुहान करो।
बहुत बहा चुके रक्त-रुधिर, अब धरा को और ना लाल करो।
उठो, जागों, कुछ काम करो, कण-कण में देश प्रेम का भाव भरो..।

हृदय-पीड़ा पर महरम मलकर, भय-भूख का काम तमाम करो।
रणभेदी पर तिलक लगाकर, दुश्मनों-जयचंदों का संहार करो।
वंचित-गरीबों की झोली में अधिकार भरकर, वृद्धो को प्रणाम करो।
भारत का अभिमान भरो, विश्व शांति और बंधुता में सबसे ऊँचा नाम करो।
उठो, जागों, कुछ काम करो, कण-कण में देश प्रेम का भाव भरो..।
उठो, जागों, कुछ काम करो, कण-कण में देश प्रेम का भाव भरो..।


© Pawan Belala 2017

PC: Subash Ch Maharana


 

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41 thoughts on “उठो, जागों, कुछ काम करो, कण-कण में देश प्रेम का भाव भरो.।

  1. भारत का अभिमान भरो, विश्व शांति और बंधुता में सबसे ऊँचा नाम करो..राष्ट्रप्रेम एवं इन्शानियत की भावनाओं से ओतप्रोत एक जबर्दस्त कविता राष्ट्र को समर्पित।बहुत खूब।

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  2. Thank-you for visiting my blog! Your blog looks very interesting and I like the photos and illustrations, but unfortunately, I can only read English 😦 But please feel free to drop in any time, and thanks again for reading my stuff!

    Liked by 1 person

  3. apke is rastraprem ka main puri tarah samman karta hun lekin

    agar aap mujhse pucho ki tum duniya main kis chij se vichlit hote ho to mera jawab hoga rastrawaad iski wajah bhi rahi hai qki hamesha rastrawaad naam ki do dhari talwaar ke dhar par adhikatar ham hi rahe hai jab ki mera Rasool ye kehta hai ki ek momin ke liye uske mulk se wafadari uska aadha Imaan hai,
    yah aisi aandhi hai jisme kuch nahi dikhta or sab kuch ujad jata hai yahi wajah rahi hai ki main hamesha se swargiya Ravindra Nath Tagor ji ke Rastrawaad ko sabse behtar manta hun

    maine apne comment me vichlit word is liye use kiya kyoki ek sacha musalman hone ki yahi nishani hai ki ap sirf khuda se darte hai uski banai kisi or makhlukat se nahi

    waise apka yah pura post mujhe andar se jhakjhor diya un sabhi veer shahido ko salam jinhone apne apne mulk se wafadari ki or uske liye apna lahu bahaya apni jaan di

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