सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए..!

कभी पद्मावत फ़िल्म के लिए तो कभी नेशनल मेडिकल बिल के नाम पर, कभी इजराइल के प्रधानमंत्री बेन्जामिन नेतन्याहू के भारत यात्रा के विरोध में, कभी प्रधानमंत्री के नीतियों से संबंधित हो या फिर उनके वादाखिलाफी के नाम पर हंगामा। SSC भर्ती प्रक्रिया में हुए महा घोटाले की बात करे या फिर झारखंड में पारा शिक्षकों का आंदोलन..देश का अन्नदाता किसान खेत-खलिहान छोड़ सड़क पर उतर चुका हैं! उड़ीसा केंद्रीय विश्वविद्यालय में छात्र असंतोष हो या विश्वविद्यालय के उप-कुलपति द्वारा साइन डाई की घोषणा कर घंटे भर में विश्वविद्यालय खाली करवाने का तुगलकी फरमान। त्रिपुरा में प्रतिमाओं के विध्वंस व कालिख पोतने से लेकर केरल में संघ के कार्यकर्ताओं की निर्मम हत्या..। मोदी-योगी, राहुल-सोनिया, बुआ-बबुआ, मफलर-चारा में उलझे रहने वाले हमारे देश में आए दिन आंदोलन और आंदोलनकारियों की एक बाढ़ सी आ गई हैं। सारा देश व हमारे देशवासी इन आंदोलनों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अछूते नहीं रहे हैं, और जो अभी तक इस विचारधारा की सुनामी से अप्रभावित रहने के दावे करता हैं, उनको NDTV के स्टूडियो से पत्रकार पुरुष रवीश कुमार जी शब्दों के चक्रव्यूह में उलझाकर तटस्थता से बचा रहे हैं।

कोई धर्म युद्ध का दावा कर रहा हैं, तो कइयों का मुख्य मकसद अपनी अधपकी सियासी रोटियों को सेकना भर हैं। अपने इस महत्वकांक्षी यज्ञ में ये सियासी सियार, वैचारिक यज्ञवेदी में आग लगा कर हमारे छात्रो, युवाओं, किसानों, दलित-वंचितों व अल्पसंख्यक को आंदोलन की दहकती आग में झोंक रहे है। आज के इस वैचारिक मतभेद और भविष्य के उपापोह में एक बार फिर महाकवि दुष्यंत कुमार अपने काव्य पदो से जनमानस को आह्वान करते प्रतीत हो रहे हैं, जहाँ की उन्मुक्त झोंको में कोई किसी की विचारों संग सरोकार नहीं रखता। आइये एक बार फिर उनको नमन करते हुए उनके कलमबद्ध गीत को दोहराया जाय…….
हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए..!
आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,
शर्त थी लेकिन कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए..!
हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में,
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए..!
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए..!
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए..!

#दुष्यंत कुमार

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5 thoughts on “सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए..!

  1. ये सब मीडिया का करा धरा है,
    लोग खुद के घर जला लेते हैं, अखबार में रहने के लिए

    Liked by 2 people

    1. बिल्कुल पंकज जी,
      टीवी स्क्रीन पर TRP बैच रहे मीडिया पुरुषों को घर चलाने के लिए मुद्दे भी तो चाहिए होता हैं।

      Liked by 1 person

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