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इश्क की गाथा इतिहास बन जाये।


हवा में कल वाली बात नहीं सुहाने लम्हों का आज साथ नहीं गजलों में हकीकतों का हिसाब नहीं परवाह करने वाले ही जब पराये हो फिर सावन-भादों में भी बूंदो की प्यास नहीं। मुसाफिरों सी टकराहट हुई थी होठों पर हंसी की मिलावट हुई थी दोस्ती की रूह पर, भरोसे की सजावट हुई थी मोहब्बत, पाकीजा, दीवानगी, सादगी, हुस्न, कशिश, दिलकश, हया, इबादत… जाने कितने … Continue reading इश्क की गाथा इतिहास बन जाये।

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चुनावी सर्दी में दलित बजरंगबली


“बजरंगबली एक ऐसे लोक देवता हैं, जो स्वयं वनवासी हैं, निवासी हैं, दलित हैं, वंचित हैं. भारतीय समुदाय को उत्तर से लेके दक्षिण तक, पूरब से पश्चिम तक, सबको जोड़ने का काम बजरंगबली करते हैं।” उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा अलवर जिले के मालाखेड़ा की एक चुनावी रैली में बड़बोले बयान के बाद सोशल मीडिया पर भूकंप और मुख्यधारा की मीडिया में सुनामी … Continue reading चुनावी सर्दी में दलित बजरंगबली

मनाही हैं !


कई साल बीते, कुछ महीने छूटे, सप्ताह-दिनों की तो आनी जानी हैं। जीवन के उस अधूरे हिस्से में आज भी, सबके आने की मनाही हैं। सावन-भादो सब बीत गया, होठों पे मुस्कान बेमानी हैं। आम पीपल सब ठूंठ हो गए, नदी रेत से मांगे पानी हैं। सिसकतीं ख्वाइशे, तन्हाई और रुसवाई में, चर्चाओं का चनाचूर गरम हैं। महफ़िलो में सुकून-ए-दिल भी बेंच, रात की आहटों … Continue reading मनाही हैं !

रावण Laughing@दशहरा


#hehahaha…. 🙂 🙂 खुश तो बहुत हो रहे होंगे साल दर साल मेरी बड़ी- बड़ी पुतलो को आग लगा कर के…फूंक के ! कितना प्रदूषण करते हो… वायु, ध्वनि से लेकर आकाश तक के निर्मलता को दूषित कर देते हो…  हां हुई थी मुझसे पाप एक दफा, बहन के अपमान से तिलमिलाकर, जिस पाप की सजा मे, मैं हर साल जल रहा हूँ..!  जो पाप अब तुम्हारे यहाँ fashion … Continue reading रावण Laughing@दशहरा

विदाई का दर्द और सूनापन : रिवाज के विभिन्न रंग (Felling Heart broken and alone at Durga Pandal)


Originally posted on पवन Belala Says❤️:
पंडाल वाले साउंड बॉक्स पर दुर्गा अमृतवाणी का पाठ अनुराधा पौडवाल जी कर रही हैं..! विभिन्न अंतराल में भोजपुरी, बंगला और हिंदी वाले देवी भजन बज रहे हैं..! लाइट वाले धीरे धीरे सामान समेटने की तैयारी कर रहे हैं..! मिठाई, Ice-cream,  बादाम, गोलगप्पा वाले भाई लोग अंतिम दिन का चांदी काटने के लिए रामलीला मैदान का रूख कर रहे हैं… Continue reading विदाई का दर्द और सूनापन : रिवाज के विभिन्न रंग (Felling Heart broken and alone at Durga Pandal)

Dr. Kalam & World Students’ Day


“All Birds find shelter during a rain. But Eagle avoids rain by flying above the Clouds. Problems are common, but attitude makes the difference!!!” ― Dr. APJ Abdul Kalam Dear readers, Today is the birth anniversary of former President of India, great teacher and eminent scientist Bharat Ratna Dr. Avul Pakir Jainulabdeen Abdul Kalam (15 October 1931 – 27 July 2015) sir. I pay my … Continue reading Dr. Kalam & World Students’ Day

देश को चाय वाला प्रधानमंत्री क्यो नहीं चाहिए ?


जब कोई शौक, आदत बन रोजमर्रा की जरुरत का स्थान ग्रहण कर ले फिर ये बड़ी हानि पहुँचाती है। देश के सबसे बड़े भाई, नरेन्दर जी द्वारा देशी और अंतराष्ट्रीय सार्वजनिक मंचो से वर्णित चायवालों की ग़रीबी और पिछड़ेपन की गाथा से प्रभावित होकर भारतियों ने चाय संग कुछ तगड़ी किस्म वाली जुड़ाव स्थापित किया हैं। नुकसान-फायदे से इतर कुछ भक्त, भक्ति में रम कर … Continue reading देश को चाय वाला प्रधानमंत्री क्यो नहीं चाहिए ?

भारत में साक्षरता और शिक्षा व्यवस्था का पोस्टमार्टम रिपोर्ट 2018


2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में सात वर्ष और उससे अधिक उम्र के व्यक्ति जो किसी भी भाषा में समझ के साथ पढ़ और लिख सकते हैं, साक्षर माना जाता है। जो व्यक्ति केवल पढ़ सकता है लेकिन लिख नहीं सकता, साक्षर नहीं है। इसके अतिरिक्त, एक व्यक्ति को साक्षर के रूप में दर्जा प्राप्ति हेतु कोई औपचारिक शिक्षा या न्यूनतम योग्यता प्राप्त करने … Continue reading भारत में साक्षरता और शिक्षा व्यवस्था का पोस्टमार्टम रिपोर्ट 2018

मामा होने और मामा बनने में व्याप्त फर्क… ?


इश्क़ ने ‘ग़ालिब’ निकम्मा कर दिया वर्ना हम भी आदमी थे काम के… –मिर्ज़ा ग़ालिब हे…प्रेम, इश्क़, मोहब्बत, प्रीत-सम्मोह, चाह-प्रणय पर दोहे, कविता, ग़ज़ल और गीत की किताब छापने वाले देवियो और सज्जनों, आपके ध्वनि, गुणीभूत व्यंग्य और चित्र युक्त मुक्तक पद्य जिस प्रेम परीक्षा में सब्जेक्टली फ़ैल होने के उपरांत उत्पन्न पक्ष के वर्णन में असफल रहे हैं। उसे सरितवा और मंजुआ के लिए … Continue reading मामा होने और मामा बनने में व्याप्त फर्क… ?

माई की महिमा और स्वामी विवेकानंद


ऐसे माँ की महिमा से कौन अपरिचित होगा ? इस चराचर जगत में पशु-पक्षी समेत सभी जीवजंतु व पादप अपने वाचिक व सांकेतिक क्रियाकलापों द्वारा अपने जननी के प्रति प्रेम का उद्गार करते हैं। मेरे मतानुसार माँ की महिमा को शाब्दिक वर्णन में बांधने की असफल कोशिश से बेहतर हैं कि महसूस किया जाय। आज गूगल सर्च बॉक्स पर माँ की महिमा (maa ki mahima) … Continue reading माई की महिमा और स्वामी विवेकानंद