ये खबर छपवा दो अखबार में, पोस्टर लगवा दो बाजार में…


अपने यहाँ आजकल नेताजी लोग जनता के लिए सुबह से लेकर शाम तक, शाम से लेकर रात तक, रात से लेकर सुबह तक और सुबह से फिर शाम तक बस यही गाना गुनगुना रहे हैं… क्यों पैसा पैसा करती है क्यों पैसे पे तू मरती है क्या बात है क्या चीज़ है पैसा क्या बात है क्या चीज़ है पैसा एक बात मुझे बतला दे … Continue reading ये खबर छपवा दो अखबार में, पोस्टर लगवा दो बाजार में…

खैनी-चूना सा ये इश्क़ हैं… 💓


बड़े-बड़े नामी डाकटर साहेब लोग अकसर यह लैक्चर बकते पाए गए हैं कि तंबाकू-चूने के मिश्रण को होठों और गालों के अंदर चुटकी में भर कर दबाने की आदत मुंह के कैंसर को दवात देती हैं। अब देखो दादा, हमने कोनों रिसर्च या MBBS तो किया नही हैं, न ही मुझे सरकार के ‘ये मुकेश हैं‘ वाले विज्ञापनी दावों पर प्रश्नचिन्ह लगा कर चक्की पिसिंग … Continue reading खैनी-चूना सा ये इश्क़ हैं… 💓

जिंदगी में ओवर लोड़ मत लीजिए…


चेहरा क्या देखते हो, दिल मे उतर के देखो ना… मौसम पल मे बदल जाएगा पत्थर दिल भी पिघल जाएगा मेरी मोहब्बत मे है कितना असर देखो ना चेहरा क्या देखते हो… हाँ, माना कि शारिरिक हुलिया और मन-मस्तिष्क में डोल रहे लूलिया का प्रतिबिंब चेहरे के दर्पण की चमक से ही साफ साफ झलकता हैं। लेकिन जिस दिन हम-आप बूढ़े हो जाएंगे न…तो ये … Continue reading जिंदगी में ओवर लोड़ मत लीजिए…

निकलो न बेनक़ाब, ज़माना खराब है..!


Mujhko lambi umar ki dua na do jitni ghuzri nagawar ghuzri.… निकलो न बेनक़ाब, ज़माना खराब है और उसपे ये शबाब, ज़मान खराब है..! सब कुछ हमें खबर है..नसीहत न कीजिये, क्या होंगे हम खराब, ज़माना खराब है, और उसपे ये शबाब, ज़मान खराब है..! पीने का दिल जो चाहे, उन आँखों से पीजिए, मत पीजिए शराब, ज़माना खराब है…. और उसपे ये शबाब, ज़मान … Continue reading निकलो न बेनक़ाब, ज़माना खराब है..!

आजकल अखबारों में बलात्कार बिकता है।


कहूँ कैसे कि मेरे शहर में अखबार बिकता है, डकैती लूट हत्या और बलात्कार बिकता है। ––अभिनव अरुण आजकल मैंने हिंदी अखबार पढ़ना लगभग बंद कर दिया हैं। भाई रहता क्या हैं, इन अखबार के पन्नों में। प्रति दिन 18 से लेकर 36 पेज वाली मोटी-पतली अखबार, स्वयं को रंग-बिरंगी विज्ञापनों में बेचकर बचें आधे से प्रथम पृष्ठ पर बलात्कार, हत्या, चोरी-लूट, छिनतई की नकारात्मक … Continue reading आजकल अखबारों में बलात्कार बिकता है।

Let’s celebrate चप्पलियाँ डे 👡


हमारे भारत जैसे विकाशील सोच वाले देश में, प्यार करना काफी मुश्किल हैं और प्यार में अपने प्रेमी संग एक खूबसूरत छायायुक्त घोसला स्थापित करना लगभग असंभव सा। आर्ट्स और कॉमर्स वाले तो फिर भी जी लेते हैं, किंतु विज्ञान से साइंस में एडमिशन लिये अधिकांश क्रांतिकारी गबरू जवान प्रेमपाश के इस केमेस्ट्री में Below 33% जैसे दर्दनाक मार्क्स के साथ पीटने के बाद मुँह … Continue reading Let’s celebrate चप्पलियाँ डे 👡