मामा होने और मामा बनने में व्याप्त फर्क… ?


इश्क़ ने ‘ग़ालिब’ निकम्मा कर दिया वर्ना हम भी आदमी थे काम के… –मिर्ज़ा ग़ालिब हे…प्रेम, इश्क़, मोहब्बत, प्रीत-सम्मोह, चाह-प्रणय पर दोहे, कविता, ग़ज़ल और गीत की किताब छापने वाले देवियो और सज्जनों, आपके ध्वनि, गुणीभूत व्यंग्य और चित्र युक्त मुक्तक पद्य जिस प्रेम परीक्षा में सब्जेक्टली फ़ैल होने के उपरांत उत्पन्न पक्ष के वर्णन में असफल रहे हैं। उसे सरितवा और मंजुआ के लिए … Continue reading मामा होने और मामा बनने में व्याप्त फर्क… ?

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सुबह-ए-उद्यान (Live From Park)


‘उफ्फ… थक गया यार।‘ पार्क के किसी किनारे पर खाली पड़े कुर्सी पर पसरता, मैं मन ही मन बड़बड़ाते हुए माथे पर छलके पसीने को हाथों से निचोड़ा। पेंट के दाएं पॉकेट की जीप खोल पॉकेट से मोबाईल निकाला। तर्जनी स्पर्श द्वारा मोबाईल पाश खोलने के उपरांत…गूगलवा का कनिष्ट एप्प पुत्र गूगल फिट पर हथोड़ा रूपी अंगुष्ठ प्रहार किया, परिणामस्वरूप एक चीत्कार संग कुछ आकड़े … Continue reading सुबह-ए-उद्यान (Live From Park)

खैनी-चूना सा ये इश्क़ हैं… 💓


बड़े-बड़े नामी डाकटर साहेब लोग अकसर यह लैक्चर बकते पाए गए हैं कि तंबाकू-चूने के मिश्रण को होठों और गालों के अंदर चुटकी में भर कर दबाने की आदत मुंह के कैंसर को दवात देती हैं। अब देखो दादा, हमने कोनों रिसर्च या MBBS तो किया नही हैं, न ही मुझे सरकार के ‘ये मुकेश हैं‘ वाले विज्ञापनी दावों पर प्रश्नचिन्ह लगा कर चक्की पिसिंग … Continue reading खैनी-चूना सा ये इश्क़ हैं… 💓

जिंदगी में ओवर लोड़ मत लीजिए…


चेहरा क्या देखते हो, दिल मे उतर के देखो ना… मौसम पल मे बदल जाएगा पत्थर दिल भी पिघल जाएगा मेरी मोहब्बत मे है कितना असर देखो ना चेहरा क्या देखते हो… हाँ, माना कि शारिरिक हुलिया और मन-मस्तिष्क में डोल रहे लूलिया का प्रतिबिंब चेहरे के दर्पण की चमक से ही साफ साफ झलकता हैं। लेकिन जिस दिन हम-आप बूढ़े हो जाएंगे न…तो ये … Continue reading जिंदगी में ओवर लोड़ मत लीजिए…

निकलो न बेनक़ाब, ज़माना खराब है..!


Mujhko lambi umar ki dua na do jitni ghuzri nagawar ghuzri.… निकलो न बेनक़ाब, ज़माना खराब है और उसपे ये शबाब, ज़मान खराब है..! सब कुछ हमें खबर है..नसीहत न कीजिये, क्या होंगे हम खराब, ज़माना खराब है, और उसपे ये शबाब, ज़मान खराब है..! पीने का दिल जो चाहे, उन आँखों से पीजिए, मत पीजिए शराब, ज़माना खराब है…. और उसपे ये शबाब, ज़मान … Continue reading निकलो न बेनक़ाब, ज़माना खराब है..!

हम पैसे लेकर एजेंडा चलाते हैं…!


यहां पैसे लेकर हिन्दू-मुस्लिम, स्वर्ण-दलित, बीजेपी-कांग्रेस के एजेंडे चलाये जाते हैं। #नोट: हमारे राष्ट्रभक्ति-देशद्रोही के क्रेस कोर्स में अभी दाखिला ले और पाए upto 50% तक का आरक्षण😋। यदि आपके आसपास किसी बहन-बेटी का बलात्कार होता हैं, तो ऐसी घटनाओं को भगवा, हरा या नीला रंग में रंगकर हिन्दू, मुस्लिम या दलित एजेंडा बनाने के लिए निशुल्क संपर्क करें। भारत के विभिन्न गांव-शहरों से हमारी … Continue reading हम पैसे लेकर एजेंडा चलाते हैं…!

आजकल अखबारों में बलात्कार बिकता है।


कहूँ कैसे कि मेरे शहर में अखबार बिकता है, डकैती लूट हत्या और बलात्कार बिकता है। ––अभिनव अरुण आजकल मैंने हिंदी अखबार पढ़ना लगभग बंद कर दिया हैं। भाई रहता क्या हैं, इन अखबार के पन्नों में। प्रति दिन 18 से लेकर 36 पेज वाली मोटी-पतली अखबार, स्वयं को रंग-बिरंगी विज्ञापनों में बेचकर बचें आधे से प्रथम पृष्ठ पर बलात्कार, हत्या, चोरी-लूट, छिनतई की नकारात्मक … Continue reading आजकल अखबारों में बलात्कार बिकता है।

मेरे ❤️ के 📲 की जिओ सिम…को प्रेम📝😍


Hi मेरे दिल की ड्राइवर, कैसा हैं मेला बच्चा ? क्या खाया मेले सोना बाबू ने ? बाबा भोले भंडारी की कृपा से बस सुबह-शाम तुम्हारे बारे में सोच-सोचकर जी रहे हैं डियर। अजी सुनो न, तुम्हें हद से बहुत ही ज्यादा मिस कर-करके न जी, फ़ेसबुक पर देखा नहीं… केतना अलोन फ़ील कर रहे हैं आजकल। अच्छा एक बात बताओ…तुम अपने हाथों से बना … Continue reading मेरे ❤️ के 📲 की जिओ सिम…को प्रेम📝😍

Let’s celebrate चप्पलियाँ डे 👡


हमारे भारत जैसे विकाशील सोच वाले देश में, प्यार करना काफी मुश्किल हैं और प्यार में अपने प्रेमी संग एक खूबसूरत छायायुक्त घोसला स्थापित करना लगभग असंभव सा। आर्ट्स और कॉमर्स वाले तो फिर भी जी लेते हैं, किंतु विज्ञान से साइंस में एडमिशन लिये अधिकांश क्रांतिकारी गबरू जवान प्रेमपाश के इस केमेस्ट्री में Below 33% जैसे दर्दनाक मार्क्स के साथ पीटने के बाद मुँह … Continue reading Let’s celebrate चप्पलियाँ डे 👡