ये खबर छपवा दो अखबार में, पोस्टर लगवा दो बाजार में…


अपने यहाँ आजकल नेताजी लोग जनता के लिए सुबह से लेकर शाम तक, शाम से लेकर रात तक, रात से लेकर सुबह तक और सुबह से फिर शाम तक बस यही गाना गुनगुना रहे हैं… क्यों पैसा पैसा करती है क्यों पैसे पे तू मरती है क्या बात है क्या चीज़ है पैसा क्या बात है क्या चीज़ है पैसा एक बात मुझे बतला दे … Continue reading ये खबर छपवा दो अखबार में, पोस्टर लगवा दो बाजार में…

रावण Laughing@दशहरा


#hehahaha…. 🙂 🙂 खुश तो बहुत हो रहे होंगे साल दर साल मेरी बड़ी- बड़ी पुतलो को आग लगा कर के…फूंक के ! कितना प्रदूषण करते हो… वायु, ध्वनि से लेकर आकाश तक के निर्मलता को दूषित कर देते हो…  हां हुई थी मुझसे पाप एक दफा, बहन के अपमान से तिलमिलाकर, जिस पाप की सजा मे, मैं हर साल जल रहा हूँ..!  जो पाप अब तुम्हारे यहाँ fashion … Continue reading रावण Laughing@दशहरा

भारत में साक्षरता और शिक्षा व्यवस्था का पोस्टमार्टम रिपोर्ट 2018


2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में सात वर्ष और उससे अधिक उम्र के व्यक्ति जो किसी भी भाषा में समझ के साथ पढ़ और लिख सकते हैं, साक्षर माना जाता है। जो व्यक्ति केवल पढ़ सकता है लेकिन लिख नहीं सकता, साक्षर नहीं है। इसके अतिरिक्त, एक व्यक्ति को साक्षर के रूप में दर्जा प्राप्ति हेतु कोई औपचारिक शिक्षा या न्यूनतम योग्यता प्राप्त करने … Continue reading भारत में साक्षरता और शिक्षा व्यवस्था का पोस्टमार्टम रिपोर्ट 2018

हिंदी Vs भारतीय भाषाएँ एवं बोलियां


टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित आलेखानुसार 2011 के जनगणना के आधार पर हिंदी बोलने वाले लोगों में 2001 में 41.03 फीसदी की तुलना में 2011 में इसकी संख्या बढ़कर 43.63% हो गई है। भारत में दूसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा बंगाली हैं। तेलगू को तृतीय पायदान से अपदस्त कर, मराठी ने आकड़ो में काफी उलटफेर कर बाजी अपने नाम कर ली हैं। संविधान … Continue reading हिंदी Vs भारतीय भाषाएँ एवं बोलियां

Sticky post

सुबह-ए-उद्यान (Live From Park)


‘उफ्फ… थक गया यार।‘ पार्क के किसी किनारे पर खाली पड़े कुर्सी पर पसरता, मैं मन ही मन बड़बड़ाते हुए माथे पर छलके पसीने को हाथों से निचोड़ा। पेंट के दाएं पॉकेट की जीप खोल पॉकेट से मोबाईल निकाला। तर्जनी स्पर्श द्वारा मोबाईल पाश खोलने के उपरांत…गूगलवा का कनिष्ट एप्प पुत्र गूगल फिट पर हथोड़ा रूपी अंगुष्ठ प्रहार किया, परिणामस्वरूप एक चीत्कार संग कुछ आकड़े … Continue reading सुबह-ए-उद्यान (Live From Park)

मौत से ठन गई…


२०वी शताब्दी के अंतिम दशक में पले-बड़े युवाओं ने राष्ट्पति के रूप में कलाम और प्रधानमंत्री के रूप में वाजपेयी जी के दिव्य नेतृत्व में भारतीय राजनीति का स्वर्ण काल जीया हैं। हमारे झारखण्ड राज्य के गठन कर्ता शिल्पकार अटल जी के प्रति, हम झारखंडियों में अपार श्रद्धा हैं। राजधानी दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में भर्ती पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी … Continue reading मौत से ठन गई…

बेचारे Uncle चच्चा बन गए..


अपने छुटकू से शहर में, आज फिर अनजान-पहचान से गलियों में मंजिल की फ़िक्र के बिना पथिक रूपेण भटकने निकला था…मैं! अभी कुछ ही दूर, मुझे नंगे पैर मैली-कुचली यूनिफॉर्म और कांधे पर झोला लटकाये स्कूल से आते छोटे-मोटे हँसते खिलखिलाते नन्हे नटखटो की टोली दिखाई दी, जो सरकारी स्कूल रूपी कैदी खाने से मुक्त हो कर बाहर ही निकले थे…। उनको देखकर मे कुछ … Continue reading बेचारे Uncle चच्चा बन गए..

जिंदगी में ओवर लोड़ मत लीजिए…


चेहरा क्या देखते हो, दिल मे उतर के देखो ना… मौसम पल मे बदल जाएगा पत्थर दिल भी पिघल जाएगा मेरी मोहब्बत मे है कितना असर देखो ना चेहरा क्या देखते हो… हाँ, माना कि शारिरिक हुलिया और मन-मस्तिष्क में डोल रहे लूलिया का प्रतिबिंब चेहरे के दर्पण की चमक से ही साफ साफ झलकता हैं। लेकिन जिस दिन हम-आप बूढ़े हो जाएंगे न…तो ये … Continue reading जिंदगी में ओवर लोड़ मत लीजिए…

Photography @Ranchi


Last evening, I had an opportunity to become a part of marriage ceremony at a village near Ranchi. Rural Culture, Aadiwasi Traditions, Folk Nagpuri Khoratha & Kurmali Music and traditional jharkhandi dishes… Wow, such an amazing experience after a long time. Hope you enjoy the collection of photos.. PC & CC: Subhash Thanks a lot guys… Please Join me on Instagram.. @ https://www.instagram.com/pawanbelala/ ©पवन Belala … Continue reading Photography @Ranchi

Rape Statistics & Misuse of Social Media in India


सोशल मीडिया विशेषतः फ़ेसबुक व ट्विटर पर आजकल सोशल नेटवर्किंग साइट्स से पीएचडी में भी गोल्ड मेडलिस्ट हुए तथाकथित बुद्धिजीवियों ने अजीबोगरीब दुर्गंध युक्त रायता फैला रखा हैं। मेरा होम पेज पिछले हफ़्ते-पंद्रह दिनों से जम्मू कश्मीर की कठुआ घटना के जस्टिस फ़ॉर आशिफ़ा के पोस्टरों-निर्मम तस्वीरों से, 2012 के निर्भया कांड के बाद एक बार फिर भरा पड़ा हैं। लाइक, कमेंट और शेयर के … Continue reading Rape Statistics & Misuse of Social Media in India

आजकल अखबारों में बलात्कार बिकता है।


कहूँ कैसे कि मेरे शहर में अखबार बिकता है, डकैती लूट हत्या और बलात्कार बिकता है। ––अभिनव अरुण आजकल मैंने हिंदी अखबार पढ़ना लगभग बंद कर दिया हैं। भाई रहता क्या हैं, इन अखबार के पन्नों में। प्रति दिन 18 से लेकर 36 पेज वाली मोटी-पतली अखबार, स्वयं को रंग-बिरंगी विज्ञापनों में बेचकर बचें आधे से प्रथम पृष्ठ पर बलात्कार, हत्या, चोरी-लूट, छिनतई की नकारात्मक … Continue reading आजकल अखबारों में बलात्कार बिकता है।