चल जग में भर दें प्यार सनम…(अतिथि कविता)


(2). अतिथि देवों भव: आलेख ! रचना : श्री मधुसुदन सिंह बस हम हों… तुम हो… साथ सनम, फिर जीवन में किस बात का हो गम, सरिता बन तूँ… मैं बरसात बनूँ, बांधों को तोड़ के पार चलूँ, अवरोध नहीं जिस दुनियाँ में, उस जलधि का प्रवाह बनूँ, आ लहर बनों, मैं धार सनम, चल दुनियाँ के उस पार सनम, जहां हम-तुम गर हो साथ … Continue reading चल जग में भर दें प्यार सनम…(अतिथि कविता)

मंजिल से भी ख़ूबसूरत सफर (अतिथि कविता)


(1). अतिथि देवों भव: आलेख ! लेखिका :  Barsha Snata Panda ना मिले तुम ना हम बिछड़े, बस जीवन भर तेरा इंताजर किया. कुछ तुम ना खुल के बोल सके, ना हमने हाल-ए-दिल इज़हार किया। विरह में तपकर खुद ही मैंने, घुटन का मीठा-खट्टा सा पान किया. तुझे तो ये भी ज्ञान नहीं, तुझपर मैंने अपना ये नाम किया… समय-काल के खिलौने-खेल में, कुदरत से … Continue reading मंजिल से भी ख़ूबसूरत सफर (अतिथि कविता)