प्रेम क्या है ?


कहते हैं, प्यार तारीखों का मोहताज नहीं होता… फिर भी प्यार करने वालो के लिए फरवरी खास होता है। वैसे तो प्यार पर आज सोशल मीडिया पर बहुत लोगों ने बहुत कुछ लिखा। तरह-तरह के मीम, जॉक्स, कविता, कहानी, इज़हार, रार-इक़रार की बाढ़ सी आयी हुई हैं, ऊपर से मातृ-पितृ दिवस मनाने वालों और बजरंग दल के लठीधारियों का अपना अलग ही स्वैग हैं। इन … Continue reading प्रेम क्या है ?

वसंत आया


आज मनुष्य का प्रकृति से रिश्ता टूट गया है। वसंत ऋतु का आना अब अनुभव करने के बजाय कैलेंडर की तारीखों से जाना जाता है। जनवरी-फ़रवरी के तोतलेबाजी में अमावास्या, एकादशी और पूर्णिमा के सामान कई विशेष दिन, माह और ऋतु हमारे लिए महत्वविहीन से हो चले हैं। दादा नाना के पञ्चाङ्ग को हमारे मोबाइल ने घर से बाहर का रास्ता दिखाया हैं। ऋतुओं में … Continue reading वसंत आया

‘राखी’ / सुभद्राकुमारी चौहान


झाँसी की रानी कविता की रचना द्वारा राष्ट्रीय चेतना की चिंगारी लगानेवाली, हिन्दी की सुप्रसिद्ध कवयित्री और लेखिका सुभद्रा कुमारी चौहान जी की एक काव्य-रचना भाई-बहन के मध्य स्थापित अटूट रिश्ते को समर्पित ‘राखी’ रचना…विदा लेते सावन की फुलझड़ियों संग आपसे साझा कर रहा हूँ… भैया कृष्ण ! भेजती हूँ मैं राखी अपनी, यह लो आज। कई बार जिसको भेजा है सजा-सजाकर नूतन साज।। लो आओ, … Continue reading ‘राखी’ / सुभद्राकुमारी चौहान

मौत से ठन गई…


२०वी शताब्दी के अंतिम दशक में पले-बड़े युवाओं ने राष्ट्पति के रूप में कलाम और प्रधानमंत्री के रूप में वाजपेयी जी के दिव्य नेतृत्व में भारतीय राजनीति का स्वर्ण काल जीया हैं। हमारे झारखण्ड राज्य के गठन कर्ता शिल्पकार अटल जी के प्रति, हम झारखंडियों में अपार श्रद्धा हैं। राजधानी दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में भर्ती पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी … Continue reading मौत से ठन गई…

आज़ादी अभी अधूरी है…


‘तहत्तर(₹70) रुपिया में आधा किलो…भाईया’ रंगबिरंगी पोशाकों में सज स्कूल जाते बच्चों को निरीह आँखों से निहारते इस मासूम ने तुतलाते हुए कहा। 72वे स्वतंत्रता दिवस के विहान में अभी कुछ ही देर में एक अल्पसंख्यक संम्पन्न वर्ग, खूब फलाना-ढिमका तरीकों से देश के कायाकल्प की खूब बकचोदी पेलते हुए उपलब्धियाँ की गिनती गिनायेगा और हमलोग ताली पीटेंगे। परंतु, साहेब… हमें आज भी 1, 2, … Continue reading आज़ादी अभी अधूरी है…

तोड़ो – रघुवीर सहाय


नवाबों के शहर लखनऊ में जन्मे, पेशे से पत्रकार स्व. रघुवीर सहाय जी की लिखी एक कालजयी उद्बोधनपरक कविता आज आपसबों संग साझा कर रहा हूँ। तो आइए, इन पंक्तियों में गोते लगाते हुए हम सृजन हेतु पथ पर अवरोध उत्पन्न करने वाले पत्थर-चट्टानों को तोड़ते हैं…. तोड़ो तोड़ो तोड़ो ये पत्‍थर ये चट्टानें ये झूठे बंधन टूटें तो धरती का हम जानें सुनते हैं … Continue reading तोड़ो – रघुवीर सहाय

चीथड़े में हिन्दुस्तान हैं… दुष्यन्त कुमार


एक गुड़िया की कई कठपुतलियों में जान है, आज शायर ये तमाशा देख कर हैरान है। ख़ास सड़कें बंद हैं तब से मरम्मत के लिए, यह हमारे वक्त की सबसे सही पहचान है। एक बूढा आदमी है मुल्क में या यों कहो, इस अँधेरी कोठारी में एक रौशनदान है। मस्लहत-आमेज़ होते हैं सियासत के कदम, तू न समझेगा सियासत, तू अभी नादान है। इस कदर … Continue reading चीथड़े में हिन्दुस्तान हैं… दुष्यन्त कुमार

मधुर-मधुर कुछ गा दो मालिक….पंडित माखनलाल चतुर्वेदी🙏


“शिक्षक और साहित्यकार बनने के बाद मुख्यमंत्री बना तो मेरी पदावनति होगी.” पंडित माखनलाल चतुर्वेदी🙏 वर्षों पूर्व आज ही के दिन…4 अप्रैल, 1889 को मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिला स्थित बाबई गांव में राष्ट्रकवि, स्वतंत्रता सेनानी व प्रभा, कर्मवीर और प्रताप नामक प्रतिष्ठित अखबारों में पत्रकार के रूप में सेवा करते हुए क्रांति की लौ सुलगाने वाले कलमकार पंडित माखनलाल चतुर्वेदी जी का जन्म हुआ … Continue reading मधुर-मधुर कुछ गा दो मालिक….पंडित माखनलाल चतुर्वेदी🙏

श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन…गोस्वामी तुलसीदासः


श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन हरण भवभय दारुणं । नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणं ॥१॥ कन्दर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरद सुन्दरं । पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचि नोमि जनक सुतावरं ॥२॥ भजु दीनबन्धु दिनेश दानव दैत्य वंश निकन्दनं । रघुनन्द आनन्द कन्द कोशल चन्द दशरथ नन्दनं ॥३॥ शिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अङ्ग विभूषणं । आजानु भुज शर चाप … Continue reading श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन…गोस्वामी तुलसीदासः

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए..!


कभी पद्मावत फ़िल्म के लिए तो कभी नेशनल मेडिकल बिल के नाम पर, कभी इजराइल के प्रधानमंत्री बेन्जामिन नेतन्याहू के भारत यात्रा के विरोध में, कभी प्रधानमंत्री के नीतियों से संबंधित हो या फिर उनके वादाखिलाफी के नाम पर हंगामा। SSC भर्ती प्रक्रिया में हुए महा घोटाले की बात करे या फिर झारखंड में पारा शिक्षकों का आंदोलन..देश का अन्नदाता किसान खेत-खलिहान छोड़ सड़क पर … Continue reading सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए..!

श्रृंगार रस के कविश्रेष्ठ रसखान


तुम राम कहो, वो रहीम कहें, दोनों की ग़रज़ अल्लाह से है। तुम दीन कहो, वो धर्म कहें, मंशा तो उसी की राह से है। कविवर रसखान, जिन्होंने जन्म लिया था एक मुसलमान परिवार में, परंतु भगवान श्री कृष्ण उनके रोम-रोम में समाहित थे। ये भी कम आश्चर्यजनक तथ्य नही हैं कि अंतिम सांस तक उन्होंने जीवन का एक काफी बड़ा हिस्सा वृंदावन में कृष्ण … Continue reading श्रृंगार रस के कविश्रेष्ठ रसखान